Latest Hindi Shayari
हम आपनी वेफवोन का सिला किस को मनगटते हैं
हम बा तेफा लकीं वफा किस को मानगते कहते हैं"
" ख़ुद ही से की थी हम अपना राब कहते हैं कि थावत
फेर हम जो दुवा मांगतै से किस कहत मंगतय"
" जो थाय तबिबे दिल के वो दुशमन-ए-जान थाय
क्या दिल क्या दूंगा मंगत से किस कहेगा मंगते"
"महबूब जो थां वो भी नाज़ ते तो हम कहते हैं
कोइ शोख आद मगटय ते किस कहे मंतगे"
"जो वक़्त गुज़रे जाय तू वज़ीह न एता
वो वकत गया मंगते थे किस उठी मांगटी"
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